🧵 राष्ट्रीय शिल्प और पारंपरिक कलाइस लेख में
3/13/2026
कंदाकारकली (Kandakorlik) धातु की वस्तुओं पर पैटर्न, चित्र या सजावट बनाने की कला है। यह शिल्प मुख्य रूप से तांबे के काम और तांबे व चांदी की वस्तुओं की सजावट में उपयोग किया जाता है। कंदाकारकली में विशेष उपकरणों की मदद से वस्तु की सतह पर चित्रित करना, दबाना और उकेरना जैसी तकनीकें लागू की जाती हैं।
सामग्री — तांबा, कांस्य, चांदी, कभी-कभी सोना।
उपकरण — विशेष हथौड़े, छेनी और उकेरने के उपकरण।
तकनीक — पैटर्न उकेरना, रिलीफ बनाना, नक़्क़ाशी।
परिणाम — ये वस्तुएँ केवल उपयोगिता के लिए ही नहीं, बल्कि सजावटी कला के रूप में भी मूल्यवान होती हैं।
उज़्बेकिस्तान में कंदाकारकली प्राचीन काल से विकसित हुई है और विशेष रूप से Bukhara, Samarkand और Kokand जैसे शहरों में प्रसिद्ध है। तांबे, चांदी और कांस्य की वस्तुओं पर बने सूक्ष्म डिज़ाइन इन शहरों की समृद्ध हस्तशिल्प परंपराओं को दुनिया के सामने प्रस्तुत करते हैं।